कविमन
Monday, 6 July 2015
कविमन : उस लम्हें ने दिल को आतिशखाना स...
कविमन : उस लम्हें ने दिल को आतिशखाना स...
: उस लम्हें ने दिल को आतिशखाना सा कर दिया ……। जिन्हें खुशियों की गठरी बनाएं हमने थे उन्हीं लम्हों ने मुझको...
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment