Sunday, 5 July 2015

            उस लम्हें ने दिल को 
        आतिशखाना सा कर दिया ……।




जिन्हें खुशियों की गठरी बनाएं हमने थे 
उन्हीं लम्हों ने मुझको बेगाना सा कर दिया


थे लम्हें नहीं कटते जिन्हे देखे इक शाम 
वे,सरे-राह मिले औ अंजाना सा कर दिया 


थे खयालों के बारिश झमाझम बरस पड़े 
पर उनके आंसू न निकले,कुछ बहाना सा कर दिया 

उन थपेड़ो ने बेरुख़ी के, ऐसे थे ज़ख्म दिए 
के उस लम्हे ने दिल को,आतिशखाना सा कर दिया 

उठतीं लपटें कहीं हस्ती उनकी,ख़ाक न कर दे 
'धुनी' ने उन लम्हों को ,बंद तहख़ाना सा कर दिया







‪#‎सर्वाधिकार‬ सुरक्षित 


अजय मिश्र 'धुनी'

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