उस लम्हें ने दिल कोआतिशखाना सा कर दिया ……।
जिन्हें खुशियों की गठरी बनाएं हमने थे
उन्हीं लम्हों ने मुझको बेगाना सा कर दिया
थे लम्हें नहीं कटते जिन्हे देखे इक शाम
वे,सरे-राह मिले औ अंजाना सा कर दिया
थे खयालों के बारिश झमाझम बरस पड़े
पर उनके आंसू न निकले,कुछ बहाना सा कर दिया
उन थपेड़ो ने बेरुख़ी के, ऐसे थे ज़ख्म दिए
के उस लम्हे ने दिल को,आतिशखाना सा कर दिया
उठतीं लपटें कहीं हस्ती उनकी,ख़ाक न कर दे

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